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पेंटागन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कैंडियम खदान के लिए 400 मिलियन डॉलर के सशर्त ऋण की घोषणा कीसाओ पाउलो में कार ट्रकों के बीच दबी, चार घायलज़ेलेंस्की ने अमेरिका से मासिक पैट्रियट मिसाइल आपूर्ति के समझौते का दावा किया, वाशिंगटन ने नहीं दी पुष्टिहमास ने गाजा योजना पर आगे बढ़ने की तैयारी दोहराई, अमेरिका से इज़राइल पर दबाव की मांगदक्षिण-पूर्व एशिया में मजबूर इंटरनेट धोखाधड़ी का संकट: 3 लाख लोग शोषितरूसी हमलों में कीव में चार लोगों की मौत, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनायारिच्चोने की छत पर अचानक गिरीं 'लेडी गुच्ची' पैट्रिज़िया रेजियानी, गहन चिकित्सा में भर्तीमारिब में हौती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने चेतायापेंटागन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कैंडियम खदान के लिए 400 मिलियन डॉलर के सशर्त ऋण की घोषणा कीसाओ पाउलो में कार ट्रकों के बीच दबी, चार घायलज़ेलेंस्की ने अमेरिका से मासिक पैट्रियट मिसाइल आपूर्ति के समझौते का दावा किया, वाशिंगटन ने नहीं दी पुष्टिहमास ने गाजा योजना पर आगे बढ़ने की तैयारी दोहराई, अमेरिका से इज़राइल पर दबाव की मांगदक्षिण-पूर्व एशिया में मजबूर इंटरनेट धोखाधड़ी का संकट: 3 लाख लोग शोषितरूसी हमलों में कीव में चार लोगों की मौत, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनायारिच्चोने की छत पर अचानक गिरीं 'लेडी गुच्ची' पैट्रिज़िया रेजियानी, गहन चिकित्सा में भर्तीमारिब में हौती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने चेताया
समाज और संस्कृतिबुधवार, 5 अगस्त 2026

माँ के आँचल की गर्माहट और एक नवजात की पहली भूख: स्तनपान सप्ताह पर एक नज़र

परिवार में नए मेहमान के आने पर अक्सर दूध को लेकर बेचैनी छा जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार धैर्य और सही तरीका ही माँ और शिशु दोनों के लिए राहत का रास्ता है।

बांग्लादेश के एक घर में दादी का चेहरा चिंता से भरा हुआ है। नवजात पूरे दिन रो रहा है, और उन्हें लगता है कि माँ का दूध नहीं पच रहा। बेचैनी में एक बोतल में डिब्बे का दूध भरकर दे दिया जाता है। यह दृश्य कोई एक कहानी नहीं, बल्कि प्रोथम आलो की एक रिपोर्ट में वर्णित वह आम तस्वीर है, जो अनगिनत परिवारों में दोहराई जाती है। ठीक इसी समय, एक से सात अगस्त तक मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान, यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि माँ के दूध को लेकर व्याप्त भ्रांतियाँ किस तरह एक नाज़ुक रिश्ते को प्रभावित करती हैं।

यह सप्ताह सिर्फ़ जागरूकता का नहीं, बल्कि उस बुनियादी सहारे की याद दिलाने का भी है, जिसकी माँओं को अक्सर कमी रहती है। द हिंदू की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में विशेष स्तनपान करने वाले शिशुओं का प्रतिशत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के 63.7% से गिरकर एनएफएचएस-6 में 55.8% पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे सिजेरियन डिलीवरी में वृद्धि और अस्पताल से लेकर कार्यस्थल तक माँओं के लिए बेहतर सहायता सेवाओं की कमी को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

इस चिंता के बीच, पोषण की सलाहें भी सामने आ रही हैं। सीएनएन इंडोनेशिया ने यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन मेडिकल सेंटर के हवाले से बताया कि कुछ खाद्य पदार्थ, जिन्हें लैक्टोजेनिक फूड कहा जाता है, स्तन-दूध उत्पादन में मददगार माने जाते हैं। इनमें चुकंदर, गाजर, पालक और सहजन जैसी सब्ज़ियाँ, खजूर और पपीता जैसे फल, जौ और ओट्स जैसे साबुत अनाज, और चने व दालें शामिल हैं। लेकिन ओकेज़ोन से बात करते हुए बाल रोग विशेषज्ञ और स्तनपान सलाहकार डॉ. रेविना त्रांगाना ने एक अहम सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जन्म के तुरंत बाद दूध न आने पर घबराने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि शिशु जन्म से मिले शुगर और वसा के भंडार के सहारे कुछ समय तक रह सकता है। उनके अनुसार, दूध बढ़ाने वाले सप्लीमेंट लेने से पहले तीन दिन तक इंतज़ार किया जा सकता है, सिवाय उन विशेष परिस्थितियों के जब बच्चा समय से पहले या बहुत छोटा पैदा हुआ हो।

डॉ. त्रांगाना का ज़ोर सप्लीमेंट पर नहीं, बल्कि एक सरल क्रिया पर था: हर दो से तीन घंटे में स्तन को पूरी तरह खाली करना। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई माँ नियमित रूप से सप्लीमेंट तो ले रही है, लेकिन स्तन खाली नहीं कर रही, तो इससे दूध की नलिकाएँ बंद हो सकती हैं और मैस्टाइटिस जैसी दर्दनाक सूजन का खतरा पैदा हो सकता है। प्रोथम आलो की रिपोर्ट में भी इसी बात पर रोशनी डाली गई है, जहाँ 'पोज़िशन और अटैचमेंट' की सही विधि समझाई गई है: माँ की गोद में शिशु का सिर कोहनी पर टिका हो, पूरा शरीर माँ की ओर मुड़ा हो और ठुड्डी स्तन को छू रही हो। यह तरीका न केवल शिशु को पर्याप्त दूध दिलाता है, बल्कि माँ के स्तन की त्वचा को फटने से भी बचाता है।

इन सबके बीच, एक सबसे सरल और गहरी सलाह बार-बार सामने आती है: शिशु को माँ के साथ एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर रखना। प्रोथम आलो का लेख इस बात पर समाप्त होता है कि माँ के शरीर की गर्माहट में ही शिशु का विकास होता है। यह कोई चिकित्सकीय निर्देश नहीं, बल्कि एक ऐसा सत्य है जो हर रोते हुए नवजात के शांत होने और हर माँ की थकी हुई मुस्कान में झलकता है।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
25%मध्यम
2 ब्लॉक · स्थिति −0.20 से +0.30 तक
आलोचनात्मकसमर्थक
INDSEA
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.20neutral
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस+0.30aligned
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.20
स्वर

भारतीय माताओं को अकेला छोड़ दिया जाता है; समाज और परिवार स्तनपान का समर्थन नहीं करते, उन्हें हानिकारक विकल्पों की ओर धकेलते हैं।

तंत्रdenuncia sociale

परिवार के दबाव और समर्थन की कमी की कहानियाँ सुनाकर पीड़ित होने की भावना पैदा की जाती है, जो शैक्षिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उचित ठहराती है।

चूक

स्तनपान के सकारात्मक और प्राकृतिक पहलू, एक सरल और पौष्टिक समाधान के रूप में, अनुपस्थित हैं, इसके बजाय कठिनाइयों और समर्थन की कमी की कथा प्रस्तुत की गई है।

चेतावनीव्यावहारिकता
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस+0.30
स्वर

हर माँ दवाओं या चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना, सरल, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से स्तनपान की समस्याओं का समाधान कर सकती है।

तंत्रsoluzione fai-da-te

विशिष्ट लाभकारी खाद्य पदार्थों की एक सूची प्रस्तुत करके, यह एक तत्काल और सुलभ समाधान प्रदान करता है जो माताओं को सशक्त बनाता है, व्यवस्थित जटिलताओं को दरकिनार करता है।

चूक

वास्तविक कठिनाइयाँ जैसे पेशेवर समर्थन की कमी या मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ जिनका कई माताएँ सामना करती हैं, संबोधित नहीं की जाती हैं, केवल पोषण पहलू पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

व्यावहारिकताविजय
अंतिम समाचार
पेंटागन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कैंडियम खदान के लिए 400 मिलियन डॉलर के सशर्त ऋण की घोषणा की·साओ पाउलो में कार ट्रकों के बीच दबी, चार घायल·ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से मासिक पैट्रियट मिसाइल आपूर्ति के समझौते का दावा किया, वाशिंगटन ने नहीं दी पुष्टि·हमास ने गाजा योजना पर आगे बढ़ने की तैयारी दोहराई, अमेरिका से इज़राइल पर दबाव की मांग·दक्षिण-पूर्व एशिया में मजबूर इंटरनेट धोखाधड़ी का संकट: 3 लाख लोग शोषित·रूसी हमलों में कीव में चार लोगों की मौत, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाया·रिच्चोने की छत पर अचानक गिरीं 'लेडी गुच्ची' पैट्रिज़िया रेजियानी, गहन चिकित्सा में भर्ती·मारिब में हौती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने चेताया·पेंटागन ने ऑस्ट्रेलियाई स्कैंडियम खदान के लिए 400 मिलियन डॉलर के सशर्त ऋण की घोषणा की·साओ पाउलो में कार ट्रकों के बीच दबी, चार घायल·ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से मासिक पैट्रियट मिसाइल आपूर्ति के समझौते का दावा किया, वाशिंगटन ने नहीं दी पुष्टि·हमास ने गाजा योजना पर आगे बढ़ने की तैयारी दोहराई, अमेरिका से इज़राइल पर दबाव की मांग·दक्षिण-पूर्व एशिया में मजबूर इंटरनेट धोखाधड़ी का संकट: 3 लाख लोग शोषित·रूसी हमलों में कीव में चार लोगों की मौत, यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाया·रिच्चोने की छत पर अचानक गिरीं 'लेडी गुच्ची' पैट्रिज़िया रेजियानी, गहन चिकित्सा में भर्ती·मारिब में हौती हमलों से यमन में बड़े संघर्ष का खतरा, संयुक्त राष्ट्र ने चेताया·
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बुधवार, 5 अगस्त 2026

माँ के आँचल की गर्माहट और एक नवजात की पहली भूख: स्तनपान सप्ताह पर एक नज़र

परिवार में नए मेहमान के आने पर अक्सर दूध को लेकर बेचैनी छा जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार धैर्य और सही तरीका ही माँ और शिशु दोनों के लिए राहत का रास्ता है।

बांग्लादेश के एक घर में दादी का चेहरा चिंता से भरा हुआ है। नवजात पूरे दिन रो रहा है, और उन्हें लगता है कि माँ का दूध नहीं पच रहा। बेचैनी में एक बोतल में डिब्बे का दूध भरकर दे दिया जाता है। यह दृश्य कोई एक कहानी नहीं, बल्कि प्रोथम आलो की एक रिपोर्ट में वर्णित वह आम तस्वीर है, जो अनगिनत परिवारों में दोहराई जाती है। ठीक इसी समय, एक से सात अगस्त तक मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान, यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि माँ के दूध को लेकर व्याप्त भ्रांतियाँ किस तरह एक नाज़ुक रिश्ते को प्रभावित करती हैं।

यह सप्ताह सिर्फ़ जागरूकता का नहीं, बल्कि उस बुनियादी सहारे की याद दिलाने का भी है, जिसकी माँओं को अक्सर कमी रहती है। द हिंदू की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में विशेष स्तनपान करने वाले शिशुओं का प्रतिशत राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के 63.7% से गिरकर एनएफएचएस-6 में 55.8% पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे सिजेरियन डिलीवरी में वृद्धि और अस्पताल से लेकर कार्यस्थल तक माँओं के लिए बेहतर सहायता सेवाओं की कमी को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

इस चिंता के बीच, पोषण की सलाहें भी सामने आ रही हैं। सीएनएन इंडोनेशिया ने यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन मेडिकल सेंटर के हवाले से बताया कि कुछ खाद्य पदार्थ, जिन्हें लैक्टोजेनिक फूड कहा जाता है, स्तन-दूध उत्पादन में मददगार माने जाते हैं। इनमें चुकंदर, गाजर, पालक और सहजन जैसी सब्ज़ियाँ, खजूर और पपीता जैसे फल, जौ और ओट्स जैसे साबुत अनाज, और चने व दालें शामिल हैं। लेकिन ओकेज़ोन से बात करते हुए बाल रोग विशेषज्ञ और स्तनपान सलाहकार डॉ. रेविना त्रांगाना ने एक अहम सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जन्म के तुरंत बाद दूध न आने पर घबराने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि शिशु जन्म से मिले शुगर और वसा के भंडार के सहारे कुछ समय तक रह सकता है। उनके अनुसार, दूध बढ़ाने वाले सप्लीमेंट लेने से पहले तीन दिन तक इंतज़ार किया जा सकता है, सिवाय उन विशेष परिस्थितियों के जब बच्चा समय से पहले या बहुत छोटा पैदा हुआ हो।

डॉ. त्रांगाना का ज़ोर सप्लीमेंट पर नहीं, बल्कि एक सरल क्रिया पर था: हर दो से तीन घंटे में स्तन को पूरी तरह खाली करना। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई माँ नियमित रूप से सप्लीमेंट तो ले रही है, लेकिन स्तन खाली नहीं कर रही, तो इससे दूध की नलिकाएँ बंद हो सकती हैं और मैस्टाइटिस जैसी दर्दनाक सूजन का खतरा पैदा हो सकता है। प्रोथम आलो की रिपोर्ट में भी इसी बात पर रोशनी डाली गई है, जहाँ 'पोज़िशन और अटैचमेंट' की सही विधि समझाई गई है: माँ की गोद में शिशु का सिर कोहनी पर टिका हो, पूरा शरीर माँ की ओर मुड़ा हो और ठुड्डी स्तन को छू रही हो। यह तरीका न केवल शिशु को पर्याप्त दूध दिलाता है, बल्कि माँ के स्तन की त्वचा को फटने से भी बचाता है।

इन सबके बीच, एक सबसे सरल और गहरी सलाह बार-बार सामने आती है: शिशु को माँ के साथ एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर रखना। प्रोथम आलो का लेख इस बात पर समाप्त होता है कि माँ के शरीर की गर्माहट में ही शिशु का विकास होता है। यह कोई चिकित्सकीय निर्देश नहीं, बल्कि एक ऐसा सत्य है जो हर रोते हुए नवजात के शांत होने और हर माँ की थकी हुई मुस्कान में झलकता है।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
25%मध्यम
2 ब्लॉक · स्थिति −0.20 से +0.30 तक
आलोचनात्मकसमर्थक
INDSEA
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.20neutral
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस+0.30aligned
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस−0.20
स्वर

भारतीय माताओं को अकेला छोड़ दिया जाता है; समाज और परिवार स्तनपान का समर्थन नहीं करते, उन्हें हानिकारक विकल्पों की ओर धकेलते हैं।

तंत्रdenuncia sociale

परिवार के दबाव और समर्थन की कमी की कहानियाँ सुनाकर पीड़ित होने की भावना पैदा की जाती है, जो शैक्षिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को उचित ठहराती है।

चूक

स्तनपान के सकारात्मक और प्राकृतिक पहलू, एक सरल और पौष्टिक समाधान के रूप में, अनुपस्थित हैं, इसके बजाय कठिनाइयों और समर्थन की कमी की कथा प्रस्तुत की गई है।

चेतावनीव्यावहारिकता
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस+0.30
स्वर

हर माँ दवाओं या चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना, सरल, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से स्तनपान की समस्याओं का समाधान कर सकती है।

तंत्रsoluzione fai-da-te

विशिष्ट लाभकारी खाद्य पदार्थों की एक सूची प्रस्तुत करके, यह एक तत्काल और सुलभ समाधान प्रदान करता है जो माताओं को सशक्त बनाता है, व्यवस्थित जटिलताओं को दरकिनार करता है।

चूक

वास्तविक कठिनाइयाँ जैसे पेशेवर समर्थन की कमी या मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ जिनका कई माताएँ सामना करती हैं, संबोधित नहीं की जाती हैं, केवल पोषण पहलू पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

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