
ईरान-अमेरिका संघर्ष से कच्चा तेल 90 डॉलर के पार, ऑस्ट्रेलिया में उत्पाद शुल्क राहत समाप्त, अर्जेंटीना में कर वृद्धि
होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने और आपूर्ति व्यवधानों के बीच ब्रेंट क्रूड जुलाई की शुरुआत के 70 डॉलर से बढ़कर 90 डॉलर के करीब पहुंच गया, जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शनिवार को लगभग 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 2 जुलाई के 70 डॉलर के स्तर से तेज उछाल है। यह वृद्धि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़के सैन्य टकराव के कारण हुई, जिसके चलते होर्मुज जलडमरमध्य से यातायात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। शुक्रवार को ईरान ने अमेरिकी सुरक्षा वाले दो टैंकरों पर हमला किया, जबकि काला सागर में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल के पास जहाजों पर हमलों ने आपूर्ति जोखिम और बढ़ा दिया। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहा तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
इस उछाल का सीधा असर कई देशों में ईंधन की खुदरा कीमतों पर दिखा। ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल कैनबरा में 205.6 सेंट और डार्विन में 204.4 सेंट प्रति लीटर को पार कर गया, जबकि डीजल मेलबर्न में 242.7 सेंट प्रति लीटर पर पहुंच गया। सरकार 3 अगस्त से 16 सेंट प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क राहत समाप्त कर रही है, जिससे पेट्रोल 210 सेंट और डीजल 250 सेंट के पार जा सकता है। अर्जेंटीना में सरकार ने 1 अगस्त से ईंधन कर में मुद्रास्फीति-आधारित वृद्धि लागू की, जिससे पेट्रोल पर 0.5% और डीजल पर 0.75% की बढ़ोतरी हुई; सुपर पेट्रोल 2,047 से बढ़कर 2,058 पेसो प्रति लीटर हो गया। संयुक्त अरब अमीरात में अगस्त के लिए मासिक मूल्य निर्धारण के तहत डीजल 3.60 से 3.80 दिरहम और सुपर 98 पेट्रोल 3.40 से 3.60 दिरहम प्रति लीटर हो गया।
इटली में पेट्रोल की कीमतें मई के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गईं, फोर्ली में सेल्फ-सर्विस 1.989 यूरो प्रति लीटर तक पहुंच गया। सरकार ने केवल डीजल पर उत्पाद शुल्क में 17 सेंट की कटौती की है, जो 6 अगस्त तक सीमित है, जिसे उपभोक्ता संगठनों ने प्रचार का हथकंडा बताया। वहीं भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा मूल्य स्थिर रखे; पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि 20% इथेनॉल मिश्रण के कारण उपभोक्ताओं को वैश्विक उछाल से बचाया जा सका, अन्यथा कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। उरुग्वे ने अगस्त के लिए ईंधन मूल्य अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया, जबकि ब्राजील में जुलाई में पेट्रोल और डीजल की औसत कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
आगे का रुख ऑस्ट्रेलिया में 3 अगस्त को उत्पाद शुल्क की पूर्ण बहाली और इटली में 6 अगस्त को डीजल रियायत की समाप्ति पर निर्भर करेगा। ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश के पास 43 दिन का पेट्रोल भंडार है और 44 ईंधन जहाज आने वाले हैं, फिर भी अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि राहत खत्म होने से साप्ताहिक ईंधन बिल में लगभग 20 डॉलर की वृद्धि होगी और मुद्रास्फीति बढ़ेगी।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.30 | aligned |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.50 | critical |
Uruguay freezes prices, Argentina applies a small tax hike, Brazil adjusts aviation fuel – each country chooses its own fiscal path, with no reference to the Iran-US conflict.
The systematic omission of geopolitical context turns the crisis into a purely administrative issue, naturalizing fiscal decisions as inevitable.
It leaves out that the crude price surge is caused by the Iran-US conflict, thus avoiding any admission of vulnerability to external volatility.
भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने वैश्विक कच्चे तेल के $135 होने पर पेट्रोल को 94.77 रुपये प्रति लीटर पर रखा, जो दर्शाता है कि घरेलू नवाचार उपभोक्ताओं को विदेशी उथल-पुथल से बचाता है।
सरकार प्रतितथ्यात्मक गणित ('होता तो 125 रुपये') का उपयोग करके नीति को वीरतापूर्ण बनाती है और खाद्य सुरक्षा की आलोचना को टालती है।
यह इथेनॉल सब्सिडी की वास्तविक लागत या खाद्य कीमतों पर प्रभाव का उल्लेख नहीं करता; यह भी छोड़ देता है कि अन्य देशों में कीमतें उसी संघर्ष के कारण बढ़ी हैं, जिससे भारत को अद्वितीय रूप से गुणी दर्शाया गया है।
The government's decision to let the excise discount expire will push petrol above $2 a litre – a deliberate blow to household budgets.
By focusing on the government's inaction rather than global crude prices, the frame shifts blame from the conflict to domestic politicians.
Omits any reference to the Iran-US conflict, thereby framing the price rise as a purely political choice rather than a market response to geopolitical events.
Petrol prices near record highs, another blow to holiday drivers – the government forgot to cut the excise on petrol.
The emotional 'holiday blow' narrative personifies the state as guilty, while the international context disappears.
Omits that the crude increase is linked to the Iran-US conflict, thus focusing outrage on the national government.
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